४३९ ॥ श्री राम मनोहर दास जी ॥ | Rammangaldasji

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४३९ ॥ श्री राम मनोहर दास जी ॥


चौपाई:-

जन्म भूमि पावन सुख दाई। प्रगटे जँह पर श्री रघुराई।१।

दूसरे भवन में लै फिर राखा। जन्म स्थान नाम तेहि भाषा।२।

छठ्ठी बरहा भयो तहाँ पर। बाल चरित अति कीन वहाँ पर।३।

राज तिलक भा रतनसिंहासन। सिया राम बैठे यक आसन।४।


दोहा:-

कनक भवन है शयन हित, राम सिया के जान।

राम मनोहर दास कह मानो बचन प्रमान॥