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२४१ ॥ श्री अंधे शाह जी ॥ (२४७)


पद:-

कथा सुनाना सुनना भक्तौं हवन प्रार्थना का करना।

ध्यान प्रकास समाधि नाम धुनि रूप सामने भा तरना।

अन्धे कहैं जीतिये मन को सतगुरु करि चरनन परना।

यही उपाय देव मुनि सब हित बार बार युग युग वरना।४।